बुधवार, 5 अप्रैल 2017

171. नैनीताल



       आप में कितने ऐसे खुशनसीब हैं, जिन्हें अपनी साली साहिबा के साथ किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल पर जाने का मौका मिला है?
       ओह, मेरी खुशनसीबी से इतनी ईर्ष्या या अपनी बदनसीबी पर इतना कुढ़ने की भी जरुरत नहीं है, क्योंकि मेरे साथ मेरी श्रीमतीजी और साली साहिबा के साथ उनके पतिदेव भी साथ थे! साथ में साढ़ू साहब के बड़े भाई के दो किशोर बच्चे भी थे
       दरअसल, मेरी श्रीमती जी उत्तर प्रदेश की हैं। उनकी बड़ी बहन करनाल (हरियाणा) में रहती हैं और छोटी बहन मुरादाबाद के पास एक छोटे-से गाँव में। छोटी बहन के परिजनों ने कुछ वर्षों पहले काशीपुर में एक मकान बना लिया है। डेढ़-दो वर्षों में जब हमारा उधर जाना होता है, तब हम कुछ रोज गाँव में और कुछ रोज काशीपुर में बिताते हैं। काशीपुर उत्तराखण्ड में पड़ता है और वहाँ से काठगोदाम प्रायः 80 किलोमीटर दूर है। काठगोदाम तक रेल लाईन बिछी हुई है- इसके बाद ही हिमालयी क्षेत्र शुरु हो जाता है। काशीपुर से काठगोदाम के लिए ट्रेन मिल जाती है। काठगोदाम से नैनीताल मात्र 24 किलोमीटर दूर है। ...तो इस मार्च में जब हम वहाँ गये थे, तो होली गाँव में बिताने के बाद नैनीताल घूमने का कार्यक्रम बन गया।
       काशीपुर से ट्रेन सुबह है काठगोदाम के लिए- हमें ट्रेन से ही जाना चाहिए था- सस्ता भी पड़ता और आराम भी मिलता। मगर हम लापरवाही के साथ घर से निकले- देर से। काशीपुर बस अड्डे पहुँचे। पता चला, नैनीताल के लिए बस दो-ढाई घण्टे बाद मिलेगी। सो, हल्द्वानी की बस में हम बैठ गये। हल्द्वानी से काठगोदाम होते हुए हम नैनीताल पहुँचे।
       दो-एक रोज पहले वर्षा हो चुकी थी, इसलिए अच्छी-खासी ठण्ड थी। एक होटल में ठहरने के बाद हम शाम को ही नैनीताल की मुख्य सड़क (माल रोड) पर टहलने निकल पड़े। नैना देवी मन्दिर तक हम हो आये।
       अगली सुबह बाकायदे एक किराये वाली कार लेकर हम घूमने निकले। खास-खास पर्यटन स्थल घुमाने के बाद दोपहर तक कारवाले ने हमें नैना देवी मन्दिर के पास उतार दिया। हमने मन्दिर में पूजा की। फिर हमने दो चप्पू वाले नाव किराये पर लिये और नैना झील में बोटिंग करते झील की दूसरी तरफ (बिलकुल दूसरी तरफ नहीं, आधी से कुछ आगे) उतर गये। वहाँ से हम पैदल टहलते हुए होटल में लौट आये।
       दोपहर बाद बस से काठगोगाम तक आये, वहाँ से ट्रेन पकड़कर रात तक काशीपुर लौट आये हम।
       ऐसे स्थलों के पर्यटन का वर्णन शब्दों में करना सबके बस की बात नहीं होती, इसलिए कुछ छायाचित्र प्रस्तुत हैं- इन्हीं से पर्यटन के आनन्द का अनुभव कर लिया जाय...    



























  

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