बरहरवा के बँगालीपाड़ा (कालीतला) में जो दुर्गापूजा होती है, वहाँ की दो खासियत है- एक तो वहाँ आडम्बर, दिखावा या तामझाम नहीं के बराबर होता है; दूसरे "कला" की किसी-न-किसी विधा को वहाँ हर साल "थीम" बनाया जाता है.
तो इस बार रेत या बालू से बनी कलाकृतियाँ वहाँ प्रदर्शित की गयी हैं. आम तौर पर सैण्ड-आर्ट का प्रदर्शन समुद्र के किनारे ही देखने को मिलता है. बरहरवा के एक पूजा-पण्डाल में इनका प्रदर्शन एक नयी बात है.
देखिये-
ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "समय की बर्बादी या सदुपयोग - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
जवाब देंहटाएंसुन्दर ।
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