शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

47. ऐसी किताबें अपने यहाँ कब छपेंगी?



       परसों सन्दीप कुमार रावत नाम के एक नौजवान घर में आये थे उनका व्यक्तित्व देखते हुए उन्हें "सेल्समैन" कहने में अच्छा नहीं लग रहाखुद को बनारस का बताया उन्होंने- कहा एम.बी.ए. कर रहे हैं। हालाँकि मेरे अनुमान को भी उन्होंने सही बताया- कि मूलतः वे उत्तराखण्ड के हैं।
       2,000 रुपये में 3+2 किताबें वे दे गये।
       मेरे बेटे अभिमन्यु ने बीते मार्च में 10वीं की परीक्षा दी। मैं सोच ही रहा था कि 'फ्लिपकार्ट' से कोई भारी-भरकम किताब उसे मँगा दूँ, ताकि वह मोबाइल, टीवी, कम्यूटर से कभी-कभार दूर भी रहे। पिछले साल सत्यजीत राय के अमर चरित्र "फेलू'दा" के सारे (शायद 26) लघु उपन्यास वह बिना रुके पढ़ गया था- ये उपन्यास दो खण्डों में हैं। चूँकि "बँगला" उसने अभी ठीक से नहीं सीखा है, इसलिए अँग्रेजी अनुवाद उसे मँगाकर देना पड़ा था। मैंने सोच रखा है- अपने लिए मैं मूल बँगला संस्करण ही मँगवाऊँगा- और हो सका, तो हिन्दी में अनुवाद भी करूँगा!
       खैर, तो सन्दीप जी ने 2,000/- रुपये में जो किताबें हमें थमायीं, वे हैं-
1.       Visual Dictionary (Page- 672, Rs. 1,999/-)
2.       Knowledge Encyclopaedia (Page- 352, Rs. 1,999/-)
3.       Top 10 of Everything  (Page- 256, Rs. 1,675/-)
4.       Compact Oxford Dictionary (South Asia Edition)
5.       Compact Oxford Thesaurus (South Asia Edition)
आखिरी दोनों किताबें एक 'सेट' है और इस सेट की कीमत 1,995/- अंकित है ऊपर की तीनों किताबें- कहने की जरुरत नहीं- रंगीन चित्रों से भरी हुई, अच्छे कागज पर छपी हुई और अच्छे से बँधी हुई हैं। जानकारियों की भरमार हैं इनमें। इन्हें आदर्श 'रेफेरेन्स बुक' के तौर पर घर में सदा रखा जा सकता है।
      मैं सोच रहा हूँ- अपने भारत में, अपनी भारतीय भाषाओं में ऐसी किताबें आखिर कब उपलब्ध होंगी?
       यह विचार मेरे मन में इसलिए भी उठ रहा है कि भारतीय स्थापत्य, भारतीय संगीत इत्यादि पर नाममात्र की जानकारी है इनमें। जाहिर है, मैं भारतीय पृष्ठभूमि पर ऐसी मौलिक किताबें रचे जाने की बात कर रहा हूँ, न कि अमेरिकी या यूरोपीय रचनाओं के अनुवाद की!  

2 टिप्‍पणियां:

  1. फिलहाल तो केवल इंतज़ार ही कीजिये ऐसी किताबों के यहाँ छपने का ... खैर जो भी हो काफी बढ़िया कलेक्शन मिल गया आपको ... बधाइयाँ !

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